Do Scientists Believe In God - क्या वैज्ञानिक धार्मिक होते हैं?

आज से लगभग 2300 साल पहले हुए आधुनिक एस्ट्रो साइंस (Also Nearly All Pseudoscience) के जनक महान वैज्ञानिक "टॉलेमी" ने एक बार कहां था
.
जब भी मैं आसमान में विचरते हुए इन देवलोको को देखता हूँ... मेरे कदम पृथ्वी से स्वयं ऊपर उठ जाते है और मुझे एहसास होता है कि मैं साक्षात "ज्यूस" (ग्रीक ईश्वर) की छाया में उनके अलौकिक प्रकाश में नहा कर अमृतपान कर रहा हूँ !!!
.
Well... टॉलेमी ने चट्टानों, झरने, नदियो को देख कर कभी भी ईश्वर को याद नही किया... पर ब्रह्माण्ड के इन स्याह अंधेरो के परे जहाँ टॉलेमी के तर्क और ज्ञान की सीमा उसे समाप्त होते हुई दिखी... वहां उसके पास आसमान में विचरते हुए पिंडो के लिए एक ही कारण शेष रह जाता था !!!

God !!!



सर आइजक न्यूटन... जिन्हें विश्व का प्रथम वैज्ञानिक कहा जाता है... खुद एक धार्मिक इंसान थे
ग्रहो की गति की सफलतम व्याख्या करने वाले, प्रकाश के नियमो को प्रतिपादित करने वाले, गुरुत्व की गणितीय समीकरणों को प्रतिपादित करने वाले न्यूटन ने... अपनी जिंदगी का अधिकतर हिस्सा धर्म ग्रंथो की खोज पड़ताल कर... "बाइबिल से प्रलय की तारीख खोज निकालने" अथवा पारे को सोने में कन्वर्ट करने जैसी वाहियात चीजो में नष्ट कर दिया !!!

न्यूटन दुनिया को गणितीय रूप में ये समझाने वाले पहले व्यक्ति थे कि ग्रह सूर्य के चारो ओर किस बल से अपनी कक्षा में टिके रहते हैं और कैसे गति करते है
पर "stellar evolution" से अपरिचित न्यूटन के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि... ये ग्रह अपनी कक्षा में आये कैसे?
तो न्यूटन के पास भी इस बात का एक ही जवाब था
And After God Set Planets In Motion !!!

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The Problem With Omnipotent God

अक्सर धार्मिकों द्वारा ज्यादातर वैज्ञानिको के "आस्तिक" होने के तथ्य को उठाकर धर्मग्रंथो को जस्टिफाई करने की बचकाना कोशिश होती रही है
विश्व के इतिहास पर नजर दौड़ने पर ये स्पष्ट रूप से समझ आता है कि... तत्काल विश्व के महान मस्तिष्क अंधविश्वासों से मुक्त नही थे

और ब्रह्माण्ड को समझने की कोशिश करते वक़्त जिस बिंदु पर उनके ज्ञान की सीमा का अंत हो जाता था
उस बिंदु के पार मौजूद अज्ञात को... ईश्वरिय सत्ता घोषित कर देने के अलावा उनके पास कोई विकल्प शेष नही रह जाता था
ये वो वक़्त था... जब आग जलाने, हवा चलाने, पेड़ उगाने, ग्रहो को अपनी कक्षा में घुमाने आदि प्रकृति की हर क्रिया को संपन्न कराने के लिए...एक देवदूत हमेशा ड्यूटी में तत्पर रहता था
समय के साथ... हर बीतती खोज और वैज्ञानिक नियमो के साथ... हम अपनी नौकरी में तत्पर देवदूतों को छुट्टी पर भेजते रहे हैं।
लेकिन...

We Are Not There Yet

बहुत कुछ है... जो जानना बाकी है
अज्ञात का साम्राज्य अभी भी बहुत बड़ा है !!!
और जब तक अज्ञात है... तब तक आस्तिकता का भी वजूद कायम रहेगा 




सवाल यहाँ आस्तिक होने अथवा होने का नही है
किसी साफ़ रात में अपने सर के ऊपर जगमगाते इन अरबो सूर्यो, अंतरिक्ष में तैरते इन खरबो चट्टान के टुकड़ो, ब्लैक होल्स, सुपर नोवा आदि को देखिये...

क्या ऐसा कोई होगा... जो ब्रह्माण्ड की अनंतता पर मुग्ध अथवा विस्मित हुए बिना रह जाए?
ब्रह्माण्ड की इस विशाल सत्ता को देख... मन स्वयं ही इस ब्रह्माण्ड के निर्माता पर मनन के लिए विवश हो जाता है !!
.
लेकिन... वैज्ञानिको का ईश्वर यानी इस कायनात को बनाने वाला खुदा... धर्मग्रंथो या मजहबी किताबो में वर्णित ईश्वर नही है।
ये वो ईश्वर नही... जो सत्यनारायण की कथा से प्रसन्न होकर आपको स्वर्ग पहुचाने की गारंटी देता हो
ये वो खुदा नही... जो अपने ही बनाये इंसान को मारने पे आपको जन्नत नवाजने का वादा करता हो
और ये वो ईश्वर भी नही... 
जिसने हम इंसानो को इस धरती पर मजहब के नाम पर एक दूसरे का खून बहाने के लिए भेज दिया क्योंकि...
क्योंकि... उसे अपनी रियासत में एक औरत का सेब खाना पसंद नहीं आया
.
धार्मिक होना या अपनी किताबो को मानना कोई गलत नही है.. पर समस्या तब उत्पन्न होती है जब.. आप अपनी किताबो को विश्व की प्रथम और अंतिम ईश्वरीय आदेश घोषित कर देते है
Trust me... अगर किसी भी धार्मिक किताब में कोई भी गूढ़ ज्ञान छुपा होता तो वैज्ञानिक रोज ब्रह्माण्ड को समझने के लिए धार्मिक किताबो की खुदाई कर रहे होते




उदाहरण के लिए.. क्या कोई भी धार्मिक किताब ऐसी है... जिसमे ये बताया हो कि... "सूर्य और चन्द्रमा" क्या हैं?
क्या किसी में भी एक छोटा सा भी हिंट है कि सूर्य एक न्यूक्लिअर फ्यूजन से दहकता हुआ गोला अथवा चद्रमा एक बेजान चट्टान का टुकड़ा हो सकता है?
नहीं... हर धर्म ग्रन्थ में आपको सूर्य, चंद्रमा, बृहस्पति शनि आदि सभी आकाशीय पिंड मानवीय रूप में पृथ्वी पर युद्ध लड़ते, शादी ब्याह रचाते, छल, लोभ, अहंकार आदि से घिरी हुई कथाओ के नायको के रूप में मिलेगे

This Is What You Want To Believe ?

जाहिर सी बात है कि मानव की विकास यात्रा जिसमे मानवो ने आकाशीय पिंडो के ऊपर स्वयं का नामकरण किया था... उस यात्रा को दिव्य चोला पहनाने में कहीं ना कहीं हमसे गलती हुई है
.
क्या किसी भी धर्मग्रन्थ में रात के आसमान में नंगी आँखों से दिखाई देने वाले 5 पिंडो के अलावा किसी ग्रह का जिक्र है?
हमारे आसमान में सूर्य, चंद्रमा की तुलना में बड़ा दिखाई देता है... और चूँकि स्वाभाविक है कि "बड़ी दिख रही चीज हमसे नजदीक होनी चाहिए" लेकिन चूँकि सूर्य चन्द्र की तुलना में करोडो गुणा बड़ा है इसलिए दूर स्थित होने के बावजूद सूर्य चाँद से बड़ा दिखता है..
क्या किसी भी धर्म ग्रन्थ में ये बताया गया है कि सूर्य... चाँद की बनिस्पत हमसे ज्यादा दूर है?
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बच्चे बच्चे को ज्ञात ये कुछ सामान्य बाते जिन धर्मग्रंथो को ज्ञात नही है... उन ग्रंथो को अंतिम ईश्वरीय शब्द कैसे समझा जा सकता है?
मैं ये नही कहता कि धर्मग्रन्थ पूर्ण रूपेण कचरा है... या धर्मग्रंथो ने मानव विकास में कोई योगदान नही दिया है
ऑफकोर्स ये ग्रन्थ ही मानव के इतिहास के एकमात्र उपलब्ध दस्तावेज है... इनका अध्ययन मानवीय दृष्टिकोण से ही किया जाना चाहिए




धर्म और विज्ञान.. दोनों का उद्देश्य समान अर्थात "सत्य की खोज" है
पर धर्म और विज्ञान में मुख्य अंतर अपने उद्देश्य प्राप्ति के लिए चुना गया "मार्ग" है
जहाँ विज्ञान आपको "जानो और मानो" की राह पे चलने को कहता है
वहीं धर्म आपको तथ्यहीन श्रद्धा के मार्ग पर चलाना चाहता है
और बिना कारण... बिना तथ्य... किसी अज्ञात के प्रति दासता का अंगीकार भी... ईश्वर द्वारा प्रदत्त विवेकशील बुद्धि का गंभीर अपमान है !!!
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शायद ईश्वर का अस्तित्व हो
हो सकता है...आपकी अंतिम नियति स्वर्ग का साम्राज्य प्राप्त करना हो
शायद धर्मग्रन्थ आपको स्वर्ग तक पहुचाने की गारन्टी भी देते हो
Religion Might Tell You How To Go To The Heavens 
But... To Know... "How" The Heavens Go?
Study Science !!!
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Things Not Allowed To Do In Space

♠ Posted by Vijay Singh Thakurai in ,
1998 में लॉन्च और 18 सालो से लगातार पृथ्वी के चक्कर लगा रहा 73 मीटर लंबा और 108 मीटर चौड़ा विशालकाय सॅटॅलाइट "इंटरनेशनल स्पेस सेंटर"... पृथ्वी के अलावा एक मात्र ऐसी जगह है.. जहाँ इंसान रहते और काम करते हैं !!!
चूँकि हर कार्यालय के कुछ रूल्स और रेगुलेशन होते है... जो हमें मानते पड़ते हैं। 
कई ऐसी चीजे है... जो आप पृथ्वी पर ख़ुशी ख़ुशी कर सकते हैं लेकिन... जमीन के 400 km ऊपर स्पेस में...?
You Must Follow Certain Rules !!




Here Are 4 Things..You R Not Allowed To Do In Space !!!
.
1: NO SEX !!
पहली बात.. चूँकि ISS एक वर्कप्लेस है इसलिए वहां यौन सम्बन्ध बनाना नासा के अनुसार "नैतिकतापूर्ण" नही है...
दूसरी बात...स्पेस के माइक्रो ग्रेविटी तथा घातक रेडिएशन से भरे माहौल में प्रेगनेंसी का रिस्क नही उठाया जा सकता। ये विषम परिस्थितिया एक भ्रूण के लिए जानलेवा हो सकती है।
और अगर कोई महिला प्रेग्नेंट हो भी जाती है तो पृथ्वी पर लौटते समय की यात्रा में... वातावरण में Re-Entry के दौरान स्पेस शिप्स में होने वाला अनुभव बहुत झटकेदार होता है... इस यात्रा में अंतरिक्ष को अपने शरीर पर कई टन के वजन के प्रेशर का अनुभव होता है.. जिस प्रेशर को झेलने के लिए अस्ट्रॉनॉट्स को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है
लेकिन ये प्रेशर एक नवजात भ्रूण के लिए जानलेवा हो सकता है और Ultimately माँ के जीवन के लिए भी ख़तरा पैदा हो सकता है। 

इसलिए.. ISS पर नासा द्वारा अस्ट्रॉनॉट्स को "नो सेक्स" रूल का पालन करने को कहा जाता है। 
अफवाहे उड़ती है कि...एस्ट्रोनॉट्स शायद छुप कर सेक्स करते हो
लेकिन... ISS का 388 वर्ग मीटर का एरिया मुझे व्यक्तिगत तौर पर इतना पर्याप्त नही लगता कि... 6 लोगो की निगाह से छुप कर सेक्स किया जा सके
(No Comments On Masturbation)




2: NO ALCOHOL
नशे में किसी अस्ट्रॉनॉट द्वारा की गई एक गलती सम्पूर्ण स्पेस शिप को ध्वस्त कर सकती है... इसलिए स्पेस शिप पर शराब पीने की आज्ञा नासा द्वारा नही है
पर रशियन्स शायद इस रूल को नही मानते... कई रशियन्स अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा स्पेस में शराब पीने की हामी भरी गई है।
1970 तक नासा भी शराबबन्दी के लिए गंभीर नही थी
इन फैक्ट 1970 के दशक में... "लंबी स्पेस यात्राओ की तैयारी के दौर" में... नासा द्वारा अंतरिक्ष यात्रियों के लिए तैयार किये मेनू कार्ड में "शेरी" वाइन भी थी
लेकिन अमेरिका की आम जनता को "अंतरिक्ष यात्रियों को शराव परोसने" की खबर मिलने पर हजारो की संख्या में लोगो ने नासा को पत्र भेज कर अपना विरोध दर्ज कराया !!!
जिसके बाद नासा ने "अल्कोहल फ्री स्पेस" पालिसी अपना ली
शायद अल्कोहल को बैन करने की ये एकलौती वजह नही थी
रिपोर्ट्स कहती है कि.. चूँकि माइक्रो ग्रेविटी में भोजन आपके पेट में तैरता रहता है... शराब के साथ इसका मिश्रण भयंकर डकारों के साथ वोमिटिंग का सबब बन सकता है। पृथ्वी पर "आर्टिफीसियल जीरो ग्रेविटी" वातावरण में किये गए प्रयोगों में इसकी पुष्टि हुई है
वोमिट से निकले कण संवेदनशील मशीनरी में घुस कर गंभीर नुकसान पहुचा सकते हैं।
इसलिए रिस्क ना लेते हुए 1972 में नासा ने स्पेस में अल्कोहल को बैन कर दिया !!!

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LIFE IN THE UNIVERSE

3: NO BREADS
जी हाँ... कोई भी खाना जिसके "चूर चूर हुए कण" बाहर फैलने की आशंका हो... ISS पर बैन है
इसलिए अस्ट्रॉनॉट्स के भोजन भली प्रकार से "डिहाईड्रेटेड" और गाय तथा सुवर की चर्बी से बने "जिलेटिन" में कोटेड होते हैं।
वही जिलेटिन... जिससे आज कल दवाइयो के कैप्सूल कवर बनाये जाते हैं। 
.
4: NO LAUNDRY 
पानी... स्पेस में सबसे बेशकीमती चीज है... जिसे कपडे धोने जैसी वाहियात चीज पर कोई नष्ट नही करना चाहता
इसलिये.. अस्ट्रॉनॉट्स... एक ही अंडरवियर, शर्ट, पैंट... महीनो तक पहने रहते हैं। 
चूँकि जीरो ग्रेविटी में हमारी "सूंघने" की क्षमता बहुत अधिक प्रभावित हो जाती है और ISS का वातावरण बहुत साफ़ तथा टेम्परेचर कण्ट्रोल है... इसलिए कपड़ो की "बदबू" अस्ट्रॉनॉट्स के लिए जल्द समस्या नही बनती
लेकिन चूँकि स्पेस में अपना bone mass मेन्टेन करने के लिए अस्ट्रॉनॉट्स को व्यायाम करना पड़ता है इसलिए पसीने से कपडे गंदे होते जाते है
जिन कपड़ो को अंत में.. अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की और फेंक देते हैं.. जहाँ वातावरण में एंट्री के दौरान हवा के घर्षण से ये कपडे जल के नष्ट हो जाते हैं।
एक प्रस्तावित आईडिया कपड़ो को ना फेंक कर... उन कपड़ो को "बैक्टीरिया" को फीड करने के लिए इस्तेमाल करना भी है
जो बैक्टीरिया "मीथेन" गैस का उत्पादन कर स्पेसक्राफ्ट के लिए ईंधन मुहैया कराने का साधन भी बन सकते हैं।
Who To Know... May Be Soon We Will Be Seeing "Underwear Powered Spacecraft"




;-)
.
तो अगली बार जब भी आप शराब पिए या नए कपडे पहने या अपनी गर्लफ्रेंड के साथ नाईट आउट का प्लान बनाये तो याद रखियेगा कि ब्रह्माण्ड में फिलहाल सिर्फ पृथ्वी ही एकमात्र जगह है... जहाँ आपको अपनी जिंदगी अपने मुताबिक जीने का पूरा हक़ है।
Drink Beer.. Have Sex... Eat Pizza... !!!
Enjoy This Privilege Of Freedom Being An Earthling !!!
(Of course Change Underwear Everyday Too)
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A Tunnel Through Earth - पृथ्वी के आर पार सुरंग का सफ़र कैसा होगा ?

अगर हम पृथ्वी के केंद्र से होते हुए एक सुरंग बनाये... जो सुरंग पृथ्वी के आर पार होती हो
और हम सुरंग में कूद जाए तो.. क्या होगा ?
सबसे पहली बात... ये आपके लिए एक अच्छा अनुभव साबित नही होने वाला है
ऑफ़कोर्स पृथ्वी का केंद्र जहाँ तापमान लगभग सूर्य की सतह के बराबर और प्रेशर "30 लाख गाडियो" को सर पे उठाने के बराबर है... वहां किसी इंसान के जीवित रहने की कल्पना नही की जा सकती
इतना अधिक प्रेशर आपके फेफड़े को collapse कर देगा और तापमान आपके शरीर को मूलभूत कणो में विखंडित कर देगा

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Why It's Harder To Dig Downwards - क्या पृथ्वी के केंद्र तक खुदाई करना संभव है?

फिर भी.. As A Thought Experiment... Lets Ignore Temperature & Pressure..
मान लीजिये हम ये सुरंग बना लेते है
और... दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री युगपुरुष जी को इसमें धक्का दे देते है तो क्या होगा?
सबसे पहली बात.. सुरंग का ये सफ़र... बहुत "छिलाऊ" अनुभव होगा?
चूँकि पृथ्वी लगातार अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूम रही है (Including You)
तो जब युगपुरुष जी इस सुरंग में छलांग लगायेगे.. तो गिरते वक़्त भी उनका शरीर पश्चिम से पूर्व की ओर गतिमान रहेगा
पर चूँकि पृथ्वी की निचली सतहें... ऊपरी सतह के मुकाबले धीमी गति से घूमती है
इस कारण... गिरते वक़्त युगपुरुष जी... सुरंग की दीवारो से रगड़ खाते हुए नीचे गिरेंगे... जो कि खाल छील देने वाला अनुभव होगा
अगर आप एक आम आदमी को ये कष्ट नही देना चाहते तो... ये सुरंग "उत्तरी ध्रुव" से शुरू कर... दक्षिणी ध्रुव पर निकालना सबसे बेहतर उपाय रहेगा
क्यों? क्योंकि ध्रुवो पर पृथ्वी का रोटेशन शुन्य है।



तो नार्थ पोल से बनाई जब इस सुरंग में युगपुरुष जी गिरेंगे तो सबसे इम्पोर्टेन्ट फैक्टर होगा... Air Friction !!!
जब भी हम कोई गेंद फेंकते है तो गेंद हवा के अणुओ से टकरा कर घर्षण के कारण अपना वेग खो के रुक जाती है
उसी प्रकार... अगर सुरंग में हवा होगी तो युगपुरुष जी एक अधिकतम वेग प्राप्त करने के बाद जैसे जैसे केंद्र की तरफ बढ़ेंगे.. वैसे वैसे उनकी गति शुन्य होती जायेगी
केंद्र पर पहुच कर... चूँकि वो ऐसी स्थिति में होंगे.. जहाँ उनके चारो तरफ बराबर मात्रा में मौजूद पृथ्वी का द्रव्यमान उन्हें अपनी तरफ खींच रहा होगा
इसलिए केंद्र में जाके युगपुरुष जी हवा में भारहीन होके त्रिशंकु की तरह हमेशा के लिए स्थिर हो जायेगे।




पर अगर मान लिया जाए कि अगर हम इस सुरंग में किसी तरफ Air Friction Free Vacuum मेन्टेन कर पाते है तो स्थिति कुछ और होगी
.... वैक्यूम टनल में... युगपुरुष जी का वेग केंद्र तक पहुचते पहुचते 29000 km/hour हो चुका होगा
और... युगपुरुष जी इस वेग के साथ... केंद्र को सनसनाती गोली की तरह पार कर जायेगे
लेकिन... जैसे ही केंद्र को पार करके... युगपुरुष जी... दक्षिणी ध्रुव की तरफ बढ़ेंगे
वैसे वैसे... पृथ्वी की ग्रेविटी के कारण उनकी स्पीड कम होनी शुरू हो जायेगी
दक्षिणी ध्रुव स्थित सुरंग के छोर तक पहुचते पहुचते.. जीरो हो चुकी स्पीड के साथ... युगपुरुष जी सुरंग के दूसरे सिरे से निकल कर हवा में दो चार मीटर ऊपर तक निकल जायेगे
और
अगर उन्हें दूसरे छोर पर खड़े किसी मनुष्य ने अगर "कैच" नही कर लिया तो...
तो.. युगपुरुष जी वापस सुरंग में गिर जायेगे और उनका सफ़र दोबारा चालु हो जाएगा
और ऊपर लिखी प्रक्रिया दोहराई जायेगी
और अनंत काल तक युगपुरुष जी.. "नार्थ पोल से गिरे, साउथ पोल पे निकले" तथा... "साउथ पोल से गिरे, नार्थ पोल पे निकले" वाली क्रिया दोहराते रहेगे !!!
.
कहानी खत्म... पैसा हजम !!!
Well... कहीं आप युगपुरुष जी को कैच करने की तो नही सोच रहे?
Are You Serious??? ;-)
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Why It's Harder To Dig Downwards - क्या पृथ्वी के केंद्र तक खुदाई करना संभव है?

जमीन की छाती चीर कर खनिज पदार्थ निकालना प्राचीन काल से ही मानव का पसंदीदा शगल रहा है। प्राचीन कथाओ में पृथ्वी की खुदाई के अनेको वर्णन मिलते हैं। 
खुदाई करते वक़्त एक चीज ऐसी थी... जो उस वक़्त इंसान की समझ से परे थी
और वो ये कि... जैसे जैसे हम पृथ्वी की खुदाई करते हुए... पृथ्वी के गर्भ की ओर बढ़ते हैं
वैसे वैसे... गर्मी असहनीय रूप से क्यों बढ़ती जाती है?
.
1824 को जन्मे प्रसिद्ध वैज्ञानिक "लार्ड केल्विन" ने सुझाया था कि... पृथ्वी जन्म से ही गर्म रही होगी
लार्ड केल्विन के अनुसार.. चूँकि एक आलू को भून कर कुछ देर रख देने पर आलू की बाहरी परते ठण्डी हो जाती है लेकिन अगर आलू को चीर कर देखा जाए तो... आलू की अंदरुनी सतह गर्म ही मिलेगी
इस Analogy के आधार पर लार्ड केल्विन ने ये भी सुझाया कि पृथ्वी का अंदरुनी तापमान और समय के साथ तापमान में आने वाले अंतर को ज्ञात करके... पृथ्वी की मौजूदा आयु भी ज्ञात की जा सकती है
सन 1890 में किये अपने प्रसिद्ध प्रयोगों के बाद लार्ड केल्विन ने पृथ्वी की आयु... दो करोड़ साल आंकी थी !!!

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Discovery Of A New Ocean

Lord Kelvin... Was Badly Mistaken !!!


लार्ड केल्विन के तापमान संबंधी गलत निष्कर्षो का मुख्य कारण.. तत्काल विश्व को "रेडियोएक्टिविटी" नामक चीज की जानकारी ना होना थी
आज हम जानते हैं कि पृथ्वी की अंदरुनी सतह यानी केंद्र में रेडियोएक्टिव एलिमेंट्स का निरन्तर क्षय होता रहता है... जिस कारण पृथ्वी का केंद्र लगभग 5000 डिग्री यानी सूर्य की सतह के समान गर्म रहता है।
None The Less.. Earth Is Not A Baked Potato !!!
.
लार्ड केल्विन बेशक गलत हो लेकिन उस युग में... जब पृथ्वी की उम्र 6000 साल मानी जाती रही हो
तब... पृथ्वी की उम्र करोडो साल में आंकने का दुस्साहस भी... कम साहसिक कार्य नही कहा जा सकता 
.
चूँकि पृथ्वी की कोर अभूतपूर्व रूप से बहुत गर्म है... इस कारण पृथ्वी के केंद्र से ऊष्मा ऊपर की ओर प्रवाहित होती रहती है। यही कारण है कि ज्यो ज्यो हम पृथ्वी के केंद्र की ओर जाते है... त्यों त्यों गर्मी असहनीय रूप से बढ़ती रहती है... क्योंकि आप लगातार गर्मी के स्त्रोत की तरफ बढ़ रहे होते हैं।
पृथ्वी के केंद्र की ओर जाने पर... आपको पिघली हुए चट्टानों के लावा के समुद्र को भी पार करना पड़ता है
आप कितनी भी कोशिश करके कोई सुरंग बना लें.. लेकिन अगले ही पिघली हुई चट्टाने... साइड से बह कर उस सुरंग को भर देगी !!!



इसके साथ साथ
पृथ्वी के केंद्र में.. आपके चारो तरफ समूची पृथ्वी का भार होगा... जिसका आपके शरीर पर प्रेशर... हर इंच पर अरबो किलोग्राम होगा
प्रचण्ड तापमान और प्रेशर की उन विषम परिस्थितियों में किसी मानव के जीवित रह पाने की उम्मीद नही की जा सकती
यही कारण है कि.. 20 साल लगातार खुदाई करने के अथक प्रयासों के बावजूद... इंसान कभी भी पृथ्वी के अंदर 12 किलोमीटर से अधिक नही खोद पाया है।
.
लेकिन एक मिनट... जब हम कभी पृथ्वी के केंद्र तक नहीं पहुच पाये है तो हम कैसे जानते है कि पृथ्वी के केंद्र में क्या है?
How Do We Know Anything About Earth's Interior??
Well... हम पृथ्वी के केंद्र के बारे में उसी प्रकार जानते है... जिस प्रकार बिना सूर्य पर गए हम ये जानते हैं कि... सूर्य क्या है !
Waves Analysis !!!
सीस्मोग्राफ जैसे यंत्रो की सहायता से वैज्ञानिक... पृथ्वी के अंदर से भूकंप आदि के वक़्त आने वाली एनर्जी वेव्स का परिक्षण करते हैं
ये एनर्जी वेव्स... अलग अलग मटेरियल से गुजरते वक़्त... अलग अलग Patterns Signature देती है
इस प्रकार हम इनकी प्रॉपर्टीज का अध्ययन कर जान जाते है.. कि ये वेव्स... किन किन पदार्थो से गुजर कर आई हैं !!
प्लस... सर आइजक न्यूटन की समीकरणों के बल पर हम पृथ्वी का द्रव्यमान और साइज़ जानते है.. इस तरह हम पृथ्वी का औसत घनत्व भी निकाल सकते हैं
और हमारी कैलकुलेशन ये बताती है कि... पृथ्वी का औसत घनत्व... सतह की चट्टानों से दुगना है




अर्थात...
सतह की चट्टानों से भी कई गुणा ठोस पदार्थ... पृथ्वी के अंदर मौजूद है !!!
और ये पदार्थ.. सिर्फ "Metal" हो सकते हैं... जिसकी पुष्टि सीस्मोग्राफ भी करता है
प्लस... पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड हम साफ़ तौर पर देख सकते हैं
और एक ग्रह विशाल चुम्बक की तरह तभी कार्य करता है... जब... उस ग्रह के केंद्र में एक विशाल लौह चुम्बक मौजूद हो !!
अगर पृथ्वी के केंद्र में लौह चुम्बक अथवा आयरन Charged Particles नही होते तो सूर्य के घातक रेडिएशन से हमारी रक्षा करने वाली मैग्नेटिक फील्ड सम्भव ही नही होती
कुछ ही पलो में सूर्य की घातक किरणे पृथ्वी पर मौजूद सभी मानवो को भून कर कबाब बना देती
None The Less... पृथ्वी पर जीवन कभी सम्भव नही हो पाता !!!
.
But Anyways... Ignore Temperature Pressure 
अगर मान लेते है कि... किसी प्रकार आप तापमान और प्रेशर की विषम परिस्थितियों को दरकिनार कर किसी प्रकार पृथ्वी के आर पार एक सुरंग बना लेते हैं
तो क्या होगा... अगर कोई इसमें छलांग लगा दे?
कैसा होगा... पृथ्वी के आरपार सुरंग का सफर?
जानिये अगली पोस्ट में...
To Be Continued
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Discovery Of A New Ocean

♠ Posted by Vijay Singh Thakurai in ,
सैटेलाइट्स, स्पेस क्राफ्ट्स, नेविगेशन, मैरीन क्रूज से भी हजारो साल पहले... एक वक़्त था... जब इंसान मैदानी इलाको में अपने आशियाने बनाता था
और...चारो तरफ मौजूद समुद्र की अथाहता को देख विस्मित हुए बिना नही रह पाता था
समुद्र की इन विकराल लहरो का कोई ओर छोर नही था.. इंसान समझता था कि चूँकि पृथ्वी जल से घिरी हुई है और कई बार जल चढ़ आने पर पृथ्वी डूब जाती है और जल उतर जाने पर पृथ्वी प्रकट हो आती है
इसलिये... चूँकि हर चीज का चक्र निश्चित है... शायद.. "प्रलय काल" में पृथ्वी जल में डूब जाती हो
और जल उतर जाने पर पुनः जीवन पनपता हो
.
शायद यही कारण है कि.. लगभग हर प्राचीन सभ्यता में.. पृथ्वी का इतिहास... "पृथ्वी के जल अथवा रसातल में डूब जाने" और "ईश्वरीय दूतो" द्वारा पृथ्वी को जल से बाहर निकालने से शुरू होता है।
.
आज इक्कीसवी सदी में... हम इंसान पृथ्वी के जर्रे जर्रे की मैपिंग कर पाये है... हमने समुद्र की अथाह गहराइयो को नापा है
लेकिन क्या फिर भी ऐसा संभव है कि...सैटेलाइट्स द्वारा पृथ्वी की लगातार मॉनिटरिंग के बावजूद..
पृथ्वी पर मौजूद कोई "समुद्र" हमारी आँखों में आये बिना ही रह गया हो?
I Mean... Yes
ऐसा संभव है...पर वो इसलिए... क्योंकि वो "छुपा हुआ समुद्र" जमीन पर नही
बल्कि... जमीन से सैकड़ो किलोमीटर नीचे दफ़न है !!!



ये सोचना थोड़ा अजीब हो सकता है कि... इंसान पृथ्वी से निकल कर लाखो किलोमीटर दूर मौजूद चाँद पर अपने कदमो के निशान बना चुका है
लेकिन यही अपनी पृथ्वी पर... प्रयासों की अधिकतम पराकाष्ठा के बावजूद... हम इंसान... पृथ्वी में "12 किलोमीटर" से ज्यादा खुदाई... कभी नही कर पाये है
और ऐसा संभव है भी नही
(क्यों संभव नही है... ये अगली पोस्ट में)

इसे भी पढें -

Can We Run On Water - क्या हम पानी पर दौड़ सकते हैं?

तो वैज्ञानिको की सबसे बेहतरीन आदत ये है कि.. अगर वे "फिजिकली" स्वयं किसी स्थान पर पहुच कर प्रयोग नही कर सकते तो उस स्थिति में... 
वैज्ञानिक... उस स्थिति को प्रयोगशाला में "आर्टिफीशियल" रूप से मिमिक करके प्रयोग करने की कोशिश करते हैं।
.
पृथ्वी की सतह मुख्यतः "ओलिविन" मिनरल की बनी हुई है। 
प्रयोगशाला में ओलिविन् मिनरल को आर्टिफीशियल टेंपरेचर और प्रेशर के साथ सिंथेसाइज़ करने के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुचे कि... जमीन के लगभग 400-600 km गहराई में ओलिविन मिनरल को बदले तापमान और प्रेशर के कारण.. "रिंगवुडाइट" नामक मिनरल में परिवर्तित हो जाना चाहिए
.
चूँकि सीस्मोग्राफ की सहायता से वैज्ञानिक जानते हैं कि... "प्लेट टेक्टोनिक्स द्वारा" समुद्र तल की चट्टानों के टूट कर पृथ्वी के अंदरुनी सतह में समा जाने... अर्थात... "Subduction" के कारण... इस गहराई पर पानी के अंश भी मौजूद होने चाहिए
इसलिए वैज्ञानिको का मत था कि.. रिंगवुडाइट मिनरल में... पानी... "हाइड्रोऑक्साइड" Ions के रूप में ट्रैप होना चाहिए
आप सुविधा के लिए... रिंगवुडाइट की तुलना... पानी सोखने वाले एक स्पंज से कर सकते हैं
.
अब ध्यान देने वाली बात ये है कि.. रिंगवुडाइट नामक मिनरल... हमें अब तक सिर्फ उल्का पिंडो में ही मिला था
ऐसा कोई तरीका नही था जिससे वैज्ञानिक पृथ्वी के अंदर 500 km गहराई में जाके रिंगवुडाइट के सैंपल्स निकाल पाये
इसलिए... ये अब तक थ्योरी ही थी
लेकिन....पिछले दिनों... कुछ वैज्ञानिको को एक बेशकीमती चीज प्राप्त हुई




वो बेशकीमती चीज...
एक 5 mm का डायमंड था !!
जो ब्राजील में हुए एक ज्वालामुखी विस्फोट में.. सैकड़ो किलोमीटर का सफ़र तय करके....पृथ्वी के बाहर आ गया था
और....उस हीरे के अंदर...वैज्ञानिको को इतिहास का पहला "रिंगवुडाइट" सैंपल मिला !!!
और ध्यान देने वाली बात ये है कि...
उस रिंगवुडाइट सैंपल में... वैज्ञानिको की थ्योरी के अनुसार ही... लेकिन उम्मीद से कहीं ज्यादा....लगभग 2% पानी मौजूद था
.
2% सुनने में शायद ज्यादा ना लगे लेकिन... आपको जानके हैरानी होगी कि
अगर... Transition Zone में मौजूद समस्त रिंगवुडाइट की मात्रा का 1% भी अगर पानी है
तो भी इसका ये अर्थ है कि...
पृथ्वी पर मौजूद सभी महासागरों के सम्मिलित जल का भी... तीन गुणा पानी... पृथ्वी के गर्भ में मौजूद हैं !!!
.
इस खोज के महत्त्व का एक दुसरा पहलु भी है।
जल जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। अब तक खोजे गए सभी ग्रहो में सिर्फ पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है.. जिसकी सूर्य से "Accurate Distance" के कारण... जल जीवनदायिनी द्रव अवस्था में मौजूद है !!
चूँकि सोलर सिस्टम में जल बर्फीले धूमकेतुओं के रूप में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है इसलिए माना जाता रहा है कि.. शायद पृथ्वी के इतिहास में इन धूमकेतुओं ने पृथ्वी से टकरा कर सागरो का जल पृथ्वी पर पहुचाया होगा
लेकिन
अगर रिंगवुडाइट थ्योरी सही है तो... शायद हम "Oceans Through Comets" थ्योरी पर पुनर्विचार करने पर विवश हो जाएं !!!
.
इस प्रश्न का सही जवाब तो समय के गर्भ में छुपा है।

May Be Earth Itself Sneezes Water Out Time To Time To Proliferate Life !!!
Who Knows !!!
***************
And As Always
Thanks For Reading




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Machine Gun Jet Packs

♠ Posted by Vijay Singh Thakurai in ,,
अगर आपने कभी कोई बन्दूक अथवा रिवॉल्वर चलाई होगी तो आप भली भाँति जानते होंगे कि.. गोली चलने पर...बन्दूक की रिकॉइल आपको पीछे की तरफ़ झटका अथवा धक्का देती है


चूँकि "क्रिया के प्रतिक्रिया" के नियम से देखा जाए तो ऐसा होना स्वाभाविक भी है

तो आज का सवाल ये है कि... अगर कोई शक्तिशाली गन जैसे AK-47 अगर जमीन की तरफ चलाई जाए तो क्या इसकी रेकॉइल आपको हवा में ऊपर धकेलेगी?

अगर हाँ... तो क्या आप मशीनगन को जमीन पर चला कर... उड़ सकते हैं?
सुनने में शायद आपको ये मूर्खतापूर्ण लगा हो
लेकिन... देखा जाए तो जवाव.. YES है !!!

Gau Avenger
राकेट इंजीनियरिंग की दुनिया में.. एक राकेट अपने पेंदे अथवा तली की ओर फ्यूल बर्न करके गैस और दूसरे पदार्थ तेजी से निकालते है
नीचे निकल रहे ये पदार्थ.. स्वाभाविक तौर पर ऊपर की और एक प्रतिक्रिया बल लगाते है... जिससे राकेट हवा में ऊपर उठ कर उड़ता है
बल्कि देखा जाए तो आपके दीवाली के राकेट से लेकर... मंगल और शुक्र तक जाने वाले राकेट तक... इसी सिद्धांत पे काम करते हैं !!!
.
इंजीनियरिंग की दुनिया में... उड़ने के लिए नीचे की ओर शूट किये पदार्थ और उड़ने वाली वस्तु के वजन के अनुपात को "THURST TO WEIGHT" अनुपात कहते हैं
अगर ये अनुपात... एक से ज्यादा है तो स्पेस व्हिकल उड़ता है
अगर अनुपात एक से कम है... अर्थात... राकेट नही उड़ेगा !!!





.
एक AK 47, एक सेकंड में.... 715 M/S की रफ़्तार से 8 ग्राम की 10 गोलिया दागती है
तो इसके द्वारा उत्पन्न की गई टोटल thrust हुई... 57.2 न्यूटन !!
यानी... लगभग 13 पाउंड !!!
अब चूँकि एक फुल्ली लोडेड AK 47 का वजन लगभग 10 पाउंड होता है
इसलिए... कहा जा सकता है कि...
अगर आप एक AK 47 की नाल जमीन से टिका कर... किसी तरह ट्रिगर दबा दें तो...
AK 47... हवा में ऊपर उठ जायेगी 
लेकिन...
एक अकेली AK 47 चूँकि सिर्फ 3 पाउंड वजन को ऊपर उठाने की ताकत रखती है
इसलिए... अगर आपको AK 47 की मदद से हवा में उड़ना है तो...
आपको काफी AK 47 की जरुरत पड़ने वाली हैं !!!
.
This is how you need to arrange AK 47 all together

अब यहाँ एक फंडामेंटल प्रॉब्लम काट्रिज की है

एक AK47 की मैगज़ीन में लगभग 30 गोलिया होती है.. जो 10 बुलेट/सेकंड की दर से... सिर्फ तीन सेकंड में खाली हो जायेगी
यानी तीन सेकंड हवा में उड़ने के बाद आप नीचे आ जायेगे
sure... मैगजीन में गोलिया बढ़ाई जा सकती है (But There Is A Limit)
अगर AK 47 में 250 से ज्यादा गोलिया होगी... तो AK 47 इतनी भारी हो जायेगी... कि गोली चलाने के बावजूद वो ऊपर नही उठेगी
ये राकेट साइंस की एक फंडामेंटल प्रॉब्लम है
Fuel Makes You Heavier...
यही कारण है कि... कोई भी एरोप्लेन, अथवा राकेट अथवा स्पेस क्राफ्ट हमेशा लिमिटेड मात्रा में ही फ्यूल लेके यात्रा करते हैं !!
.
तो Here Is Our Answer
250 राउंड से भरी लगभग 300 AK47.. अगर किसी प्रकार से वर्टिकल रूप से आप उन्हें अरेंज करके सबका ट्रिगर एक साथ दबा पाये
तो... लगभग 100 मीटर/ सेकंड की दर से उड़ते हुए आप हवा में लगभग आधा किलोमीटर ऊपर तक जायेगे
उसके बाद?
You Need A Parachute !!!




300 AK 47 को इस प्रकार अरेन्ज करके उड़ने का ख्याल लगभग असंभव ही है
क्या हमारे पास दूसरे बेहतर ऑप्शन्स है?

इस सवाल के बेहतर जवाब के लिए हम Automatic Cannon Guns की तरफ देखना होगा... जो अपने बड़े साइज़ और रेकॉइल फ़ोर्स के कारण फाइटर जेट्स अथवा War व्हिकल में लगाए जाते हैं

अमेरिका द्वारा विकसित GAU-8-Avenger (Search It On Google) एक सेकंड में लगभग 61 पाउंड बुलेट शूट करती है.. जिसकी रेकॉइल फ़ोर्स लगभग 5 टन होती है
यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि.. एवेंजर केनन जिस फाइटर जेट में लगी हुई होती है... उस जेट के दोनों इंजन की कंबाइन thrust लगभग 4 टन है

अर्थात... उस प्लेन में अगर दो एवेंजर केनन लगा दी जाए और युद्ध के वक़्त इंजन को फुल करके दोनों केनन चलाई जाए
तो इंजन की शक्ति के मुकाबले... कैनन जीत जायेगी और फाइटर जेट.. आगे की बजाय... पीछे बढ़ना शुरू कर देगा
GSH 6 30

इसके अलावा रशियन्स द्वारा विकसित GSH-6-30 कैनन लगभग 6 टन की रेकॉइल फ़ोर्स उत्पन्न करती है
यानी
अगर आप किसी तरह GSH-6-30 को कंधे पर उठा के... जमीन की तरफ फायर कर पाये
तो इससे उत्पन्न रेकॉइल फ़ोर्स के सहारे... आप उड़ कर...
एक छोटा मोटा पहाड़ भी पार कर सकते है !!!

इसे भी पढें -

Why It Is Harder To Travel Westwards? : पृथ्वी की घूर्णन गति से जुड़े कुछ रोचक तथ्य


& If You Are Interested To Know... How To Land Safely At Other Side Of Mountain?
Well...
Talk To Russians For That !!
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And As Always
Thanks For Reading !!!

Post Credits: XKCD Comics




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ALL YOU ZOMBIES: A Tale Of Time Travelling - Part-2


RECAP: जेन नामक लड़की को 1945 में रहस्यमयी ढंग से कोई किसी अनाथश्रम में फेंक जाता है। बचपन से तिरस्कृत इस लड़की को 1963 में पता चलता है कि वो वास्तव में एक लड़का है, जब नौकरी छूट जाने के बाद एक पार्क में एक अंजान लड़के सम्बन्ध बन जाने से वो गर्भवती हो जाती है। जेन के जीवन की रक्षा के लिए डॉक्टर्स उसे लड़की से मर्द बना देते है। 7 साल बाद जेन एक शराबी के रूप में एक बार में एक बारटेंडर से टकराती है। बारटेंडर जो कि "टाइम ट्रैवलर समूह" का सदस्य है, नौकरी के बदले जेन को उसके बदला लेने की पेशकश करता है... शराबी (जेन) मान जाता है और वो दोनों 7 वर्ष पूर्व समय में जाने के लिए निकल पड़ते है
आगे पढ़िए...
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इसे भी पढें -

ALL YOU ZOMBIES: A Tale Of Time Travelling - Part-1

"तुम्हे लगता है कि ये टीन का डिब्बा वाकई में समय यात्रा करा सकता है?", शराबी युवक ने कण्ट्रोल पैनल के बटनों से तेजी से खेलते हुए बारटेंडर से पूछा

"ओह बिल्कुल बेटे। 30 साल की नौकरी और 160 सफल समय यात्राये। कुछ ही देर में तुम इस टीन के डिब्बे का कमाल देखोगे" बारटेंडर ने अपने काम में तल्लीनता से जुटे रह कर, बिना शराबी को देखे बेफिक्री से जवाब दिया
शराबी मुह बना के कंधे उचका कर मशीन के अलग अलग हिस्सों को देखने लगा
मशीन बहुत ज्यादा बड़ी नही थी। बमुश्किल 4 आदमी इस अंडाकार मशीन में बैठ सकते थे। अनेको बटन से युक्त कई कण्ट्रोल पैनल सामने की स्क्रीन की तरफ थे.. जिनपे अनेको अजीबो गरीब बल्ब लगे हुए थे...जो तेजी से जल बुझ रहे थे
.
"मुझे तो ये नेशनल म्यूज़ियम से लाया हुआ कबाड़ का टुकड़ा ही लगता है। आखिर से हमें भूतकाल में कैसे ले जायेगी? जादू से?"
"जादू से नही.. वर्महोल से कह सकते हो", बारटेंडर ने उत्तर दिया
"वर्महोल? ये वर्महोल क्या होता है"




"वर्महोल.. ब्रह्माण्ड के स्पेस टाइम में सुरंगों के समान है। अभी तुम्हारे सामने हवा में एक आयाम द्वार खुलने वाला है। जो हमें समय के हिस्से को पार कर के पृथ्वी के भूतकाल के हिस्से में लैंड करायेगा"
"पर... पर ये वर्महोल खुलता कैसे है? क्या कोई हमारे पीछे पीछे भी उस द्वार में आ सकता है?" शराबी ने आश्चर्य पूर्वक पूछा
"वर्महोल तुम्हारे आसपास हर जगह मौजूद है बेटे। अगर तुम प्रोटान के खरबवे हिस्से के बराबर होते तो तुम इन वर्महोल में बिना किसी यंत्र की सहायता के यात्रा कर सकते थे। सूक्ष्म वर्महोल हर जगह मौजूद है। इस मशीन द्वारा हम "नेगेटिव एनर्जी" इस्तेमाल करके वर्महोल को बड़ा करके रखते हैं.. ताकि हमारा स्पेसशिप वर्महोल से होकर गुजर पाये और इस बीच वर्महोल बन्द ना हो"
"तब तो कोई हमारे पीछे पीछे भी वर्महोल में आ सकता है?" शराबी ने कौतुहल से पूछा

"ओह नही बेटे। जैसे जैसे हम आगे बढ़ेंगे। हमारे पीछे की सुरंग अपने आप बन्द होती चली जायेगी। वैसे भी हमारे पास इतनी नेगेटिव एनर्जी नही कि हम एक वर्महोल को लगातार खुला रख पाये। एक वर्महोल को खोलने के लिए पैदा की गई नेगेटिव एनर्जी की कीमत 1970 में समूची पृथ्वी के सम्पूर्ण राष्ट्रों की संयुक्त जीडीपी से ज्यादा है"

"लेकिन..."

"मेरे ख्याल से तुम्हे अब अपना मुह बन्द कर शांत बैठना चाहिए। टाइम ट्रैवलर समूह का सदस्य बनने के बाद समय यात्रा से सम्बंधित सभी तकनीकी बाते तुम्हे सिखाई जायेगी। इस वक़्त हमारे पास समय कम है। हमें काम पे फोकस करना चाहिए" शराबी की बात बीच में ही काट कर बारटेंडर ने कहा
शराबी को जुम्बिश में सर हिलाते देख बारटेंडर मुस्कुराया और सहसा तेजी से चीखा
"तैयार हो जाओ !"

और तेजी से एक लीवर खींच दिया।
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शने शने शराबी को होश आ रहा था। अचानक ऐसा लगा था कि वो किसी अँधेरे कुए में गिर रहा हो। शराब के असर के कारण कुछ पल के लिए शराबी चेतना शुन्य हो गया था। होश आते ही शराबी यान से बाहर कूदा
"ये क्या? हम तो वही उसी जगह पर है? क्या समय यात्रा सफल नही हुई?" शराबी ने चारो तरफ देखते हुए पूछा
"बेटे चारो तरफ ध्यान से देखो। क्या ये बर्फ वाला मौसम उस वक़्त भी था.. जब हम इस जगह पर कुछ देर पहले मौजूद थे?" बारटेंडर ने कनखियों से शराबी को देख मजे लेते हुए कहा

"ओह हाँ" शराबी ने आश्चर्य मिश्रित स्वर में कहा.. अचानक बारटेंडर को सड़क पर बढ़ते देख शराबी उसके पीछे तेजी से लपका
शराबी अब भी अपने चारो तरफ अविश्वास से देखता हुआ बढ़ रहा था। अचानक सड़क किनारे शराबी को एक बुक स्टाल दिखता है, जिसमे शराबी लपक के घुस जाता है और सामने करीने से सजे न्यूज़पेपर को फुर्ती से उठा के पलटने लगता है
और... अचानक अख़बार की तारीख देख.. शराबी के मुह से एक ठण्डी आह निकल जाती है
"हो गया भरोसा? अब चले?" बारटेंडर की व्यंगमिश्रित निगाहो को देख शराबी मुस्कुरा के जुम्बिश देता है
**************************

10 PM 1963
"क्या तुम्हे यकीन है कि यही वो वक़्त है जब तुम उस आवारा युवक से मिले थे... जिसने तुम्हे गर्भवती किया था?" पार्क के गेट पर खड़े बारटेंडर ने शराबी से पूछा
शराबी के सर हिलाने पे बारटेंडर ने कहा-" समय की कमी के कारण मैं दूसरे अधूरे कामो को पूरा करने जा रहा हूँ। ठीक एक घंटे बाद मैं तुम्हे इसी स्थान पर मिलूँगा। तब तक तुम अपना बदला पूरा कर सकते हो। बस ध्यान रहे कि उस आवारा युवक का क़त्ल मत कर देना"
शराबी को सर हिलाते देख बारटेंडर उसकी पीठ थपथपा के अँधेरे में तीव्र गति से गायब हो जाता है
********************




शराबी को छोड़ कर बारटेंडर टाइम मशीन द्वारा समय में 10 महीने आगे जाकर उस अस्पताल में पहुचता है... जहाँ जेन अपनी बच्ची के साथ एडमिट थी
जेन की बच्ची का किडनैप करके समय की कमी के कारण बारटेंडर 18 वर्ष पूर्व 1945 में जाता है.. जहाँ अपना मिशन पूरा कर जेन की बच्ची को वो एक अनाथश्रम में भर्ती करा देता है
उसके बाद काम खत्म कर बारटेंडर वापस 1963 में पहुच कर पार्क के सामने पहुचता है.. जहाँ उसने शराबी को छोड़ा था
अचानक बारटेंडर को शराबी सामने से लड़खड़ाते हुए कदमो के साथ आते हुए देखता है
.
"बेटे! हो गया बदला पूरा ? मैंने तुम्हारे सभी कार्य कर दिए है। अब हमारे जाने का समय हो गया है"
शराबी ने बारटेंडर के समीप आकर बारटेंडर को अजीब निगाहो से देखा। शराबी की निगाहो में एक अजीब से नमी चमक रही थी
"वो वहां है। मैंने खुद को देखा। लड़की के रूप में। परेशान। वो अंदर बैठी हुई है" शराबी की आवाज काँप रही थी
बारटेंडर की आँखे सिकुड़ गई थी।

"उसकी नौकरी छूट गई है। उसकी जेब में खाने के लिए भी पैसे नहीं है। वो बहुत परेशान है। मैं महसूस कर सकता हूँ। जो मेरे पास 500 डॉलर थे... मैं उसे दे आया हूँ"
बारटेंडर के चेहरे पे कई रंग आ के जा चुके थे

"मतलब ? तुम ये कहना चाहते हो? ओह गॉड !! कही तुमने खुद को ही प्रेग्नेंट?"
"जेन को देखो.. उसे कभी ये सुख नही मिला। मैं जानता हूँ उसे क्या चाहिए। मैं खुद को रोक नही पाया"
शराबी की आवाज काँप रही थी।
.
वातावरण में एक अजीब ख़ामोशी छा चुकी थी। जिसे बारटेंडर ने भंग करते हुए कहा
"जो भी हुआ सो हुआ। अब हमें चलना चाहिए। नयी जिंदगी और नयी नौकरी तुम्हारा इन्तजार कर रही है"
"पर मैं जेन को छोड़ के नही जाऊगा। उधर देखो। वो रो रही है। उसे मेरी जरुरत"
अचानक फुर्ती से बारटेंडर ने शराबी की गर्दन की एक गुप्त नस दबाई.. जिससे शराबी बेहोश हो कर बारटेंडर की बाहो में झूल गया !!!
.
"मुझे माफ़ करना बेटे!! तुम नही जानते कि तुम कौन हो? और मैं कौन हूँ? वक़्त के साथ जरूर जान जाओगे। मुझे यकीन है कि तुम मेरी जगह लेने के पूरे काबिल हो"
कहते हुए बारटेंडर की निगाहो में एक अजीब रहस्यमयी चमक विद्धमान थी
****************************




बारटेंडर 1985 में जाकर शराबी को अपने समूह के सदस्यों के पास छोड़ देता है और स्वयं 2016 में चला जाता है।
कई महीनो की थकान के बाद छुट्टी पे जाने से पूर्व हैडक्वार्टर में मिशन की रिपोर्ट जमा करने के बाद बारटेंडर अपने घर पहुचता है और बिस्तर पर लेट जाता है।

पुरानी घटनाए चलचित्र की तरह बारटेंडर के मनमस्तिष्क पर चल रही थी...अचानक टीवी पे आ रहे एक वाइल्ड लाइफ प्रोग्राम पर बारटेंडर की निगाह टिक जाती है, प्रोग्राम में दिखाया जा रहा था कि "कैसे कभी कभी एक सांप भूख लगने पर कंफ्यूजन में अपनी ही पूछ को दुसरा प्राणी समझ के खुद को ही खाना शुरू कर देता है"

"Oh and in ancient times... it was a symbol of infinity... a snake eating its own tail and regenerating itself"

बारटेंडर मानो खुद से बाते कर रहा था
"Oh jen i know who you r... but who m i? Are we all zombies ?"

बारटेंडर का दिमाग चकराने लगा था। आँखे आहिस्ता आहिस्ता नींद की खुमारी में बन्द होने लगी थी
और
अनजाने में ही बारटेंडर का हाथ "अपने पेट पर बने सिजेरियन ऑपेरशन से आये निशानों को" सहलाने लगा था
******************************
सन 1955:
बारटेंडर की अनाथाश्रम में छोड़ी हुए लड़की 10 साल की हो गई थी। लड़की की शारीरिक संरचना काफी अजीबो गरीब थी। लड़की को नही पता था कि "वो एक लड़की और लड़का दोनों है"
******************************
और समय के किसी और हिस्से में...
"हे!! कैप्टन !!! आपकी छुट्टियां मंजूर हो गई है"

मेज पर अपने कागजो में झुके "उस इंसान ने" ऊपर सर उठा के अपने जूनियर को मुस्कुरा कर देखा
"लेकिन हाई कमान चाहता है कि छुट्टी पे जाने से पहले आप एक आखिरी मिशन अंजाम दें। 1970 में जाकर आपको एक बम विस्फोट की घटना को नाकाम करना है और एक बार में नौकरी करते हुए 30 नए लड़को को नौकरी पे रखना है"

"चूँकि आप 1985 में हमें ज्वाइन करने के बाद 160 मिशन अंजाम दे चुके है इसलिए इस महत्वपूर्ण मिशन के लिए आप ही आला कमान की एक मात्र पसंद है। तैयारी कर लीजिये। 1970 में आपको हमारा पहला Recruited एजेंट मिलके गाइड करेगा। जिसका नाम "विक्टर" है... वही बाकी 29 कैंडिडेट से आपको मिलवायेगा"

इसे भी पढें -

The Amazing Facts About You

"क्या नाम बताया?" उस आदमी ने सर उठा के आँखे सिकोड़ के पूछा?
.
विक्टर !!!
.
नाम सुन कर... "उस व्यक्ति के होठो पे एक अजीब सी मुस्कराहट और आँखों में चमक दौड़ गई थी !!!
मैं तैयार हूँ !!!!
उस व्यक्ति ने उत्तर दिया !!!
ठीक है !!! कह कर जूनियर मुस्कुरा कर चला गया
.
कुछ पल शुन्य में ताक कर अचानक उस व्यक्ति ने अपनी जेब से बटुआ निकाला... जिसमे उसकी जवानी की फोटो लगी हुई थी। फोटो में दिख रहा नवयुवक एक शराबी प्रतीत होता था।
फोटो पर हाथ फिराते हुए अचानक उस व्यक्ति के चेहरे पे एक अजीब सी मुस्कराहट आ गई और वो मन ही मन बुदबुदाया
.
I Am Coming Jane...
Always Missed You Dreadfully !!!
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And As Always
Thanks For Reading !!!
.
Edited & Translated From "All You Zombies" (Short Story)
Writer: Robert Heinlein
1: जिसे ये समझ आ जाए कि... जेन की बेटी, जेन की बेटी का पिता, शराबी, बारटेंडर कौन है? वो कृपया पोस्ट शेयर करें।
2: विक्टर कौन है... जानने के लिए पोस्ट का प्रथम भाग पढ़ें




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